Tuesday, 1 May 2018

मज़दूर-दिवस पर देश के तमाम श्रम-साधकों को नमन.....ओंकार


     अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस  इनेलो प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य किरपाल सिंह अरोड़ा व  व्यापार प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह ने मजदूरों के साथ मिल कर मनाया। उन्होंने कहा 1 मई को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस' लाखों श्रमिक के बलिदान. परिश्रम, दृढ़ निश्चय और निष्ठा का दिवस है। एक श्रमिक की देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका होती है और देश के विकास में उसका अहम योगदान भी होता है। यह अलग से बताने की जरूरत नहीं कि किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका होती है। श्रमिकों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना तक नहीं की जा सकती। इसलिए श्रमिकों का समाज में अपना ही एक लक्ष्य और स्थान होता है। 1 मई “अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस” को मजदूरों का दिन कहा जाता है | इस दिन को मजदूर दिवस, श्रमिक दिवस और मई दिवस भी कहते है | यह पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय तौर पर मनाया जाता है | मजदूर दिवस पर एक प्रचलित नारा भी सुनाई पड़ता है जो शायद ही वर्ष के किसी और दिनों में सुनाई देता हो | वह नारा है ‘दुनिया के मजदूरों एक हो’ | यह बड़े दुर्भाग्य की बात है | मजदूर दिवस के दिन तो यह नारा बुलंद किया जाता है लेकिन जैसे – जैसे समय गुजरता जाता है, इसकी गूंज मंदी पड़ती जाती है |‘दुनिया के मजदूरों एक हो’ दरअसल इस नारे के पीछे मजदूरों के एक लम्बे संघर्ष की कहानी है और उसी की उपज है ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ |


      भारत में मजदूर दिवस कामकाजी लोगों के सम्मान में मनाया जाता है | भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी। ओंकार सिंह ने बताया कि मई 1, सन 1886 को मजदूरों ने अपने हक़ की लड़ाई लड़ी थी | यह एक प्रकार से मजदूरों के बलिदान का दिवस भी है | यह घटना उस समय की है, जब अमेरिका के ‘शिकांगो’ शहर में मजदूरों ने एक लम्बा आंदोलन किया था | उस समय देश के लगभग सभी कारखानों में काम करने वाले मजदूरों से बारह – बारह घंटे तक काम लिया जाता था | मजदूर यूनियन में इसे लेकर आक्रोश था और वह आठ घंटे काम करने को लेकर हड़ताल कर रहे थे |
हड़ताल के दौरान ही शिकागो की ‘हेय’ मार्केट में मजदूरों की सभा में बम धमाका हुआ | इस बम धमाके में कई मजदूरों की मौत हो गई और अनेक मजदूर घायल भी हो गए | मजदूर नेताओं को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया | बाद में गवाह से यह पता चला कि मजदूरों की कोई गलती नहीं थी |मजदूरों के इस आंदोलन की चिंगारी विश्व के अन्य देशों में भी फैल गई | इस आंदोलन से प्रेरित होकर फ़्रांस के पेरिस शहर में भी मजदूरों की एक बड़ी सभा हुई | इस सभा में शिकागों शहर में शहीद हुए मजदूरों को श्रद्धांजलि दी गई |
किसी भी देश व समाज के निर्माण में मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान होता है | ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ मनाने का उद्देश्य है 4 मई 1886 को शिकागो के हैय मार्केट में हुए बम धमाके में मरे हुए मजदूरों को श्रध्दांजलि देना और उस नारे को साकार करना जो सभी मजदूरों को एक सूत्र में बाँधता है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ मनाएं जाने के तर्क के आधार पर भारत में भी यह दिन ‘श्रमिक दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा | पहली बार भारत में मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मद्रास में मनाया गया था | इसकी शुरुआत “लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान” ने की थी |
भारत में इस दिन मजदूर सभा करके अपनी समस्याओं पर विचार – विमर्श करते है | जुलूस निकाले जाते है | अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन द्वारा इस दिन विशेष सम्मलेन का भी आयोजन किया जाता है |
इस दिन सरकार द्वारा मजदूरों के हक़ को सुरक्षित रखने के लिए कानून भी पारित किए गए है | इन कानूनों में यह बात कही गई कि प्रत्येक मजदूर को बिना किसी भेद – भाव के अपनी योग्यता व क्षमता के अनुसार श्रम – शक्ति का उपयोग करने का अधिकार है श्रमिक को जाति, धर्म, लिंग, नस्ल के आधार पर कार्य का चुनाव करने की स्वतंत्रता है | उसे बंधुआ या गुलाम बनाकर काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है | इसी प्रकार के दर्जनों कानून स्वतंत्रता से पूर्व व स्वतंत्रता के बाद मजदूरों के हित के लिए बनाए गए | उन्होंने कहा कि मजदूर दिवस की शुरुआत हुए लगभग सवा सौ साल हो चुके है | गौरतलब है कि हर एक को अपनी श्रम – शक्ति के अनुसार गरिमा-मय जीवनयापन करने का पूरा अधिकार है और उतना ही जरुरी अपने अधिकारों के बारे में पता होना | मजदूरों के हक़ को सुरक्षित रखने के लिए अनेक अधिनियम भारत में पारित किए गए है |
भारत मे लोग दो वर्गो में बटे है | पहला पूंजीपति वर्ग और दूसरा मजदूर वर्ग | मजदूर वर्ग हाड़तोड़ मेहनत के बावजूद भी अभाव की जिंदगी जीने के लिए बेबस है तो दूसरी ओर पूँजिपति वर्ग उतना ही संपन्न है | दोनों वर्गों के जीवन में बहुत बड़ा फर्क है लेकिन अफसोस यह फर्क कम होने की अपेक्षा बढ़ता ही जा रहा है |
इस अवसर पर उन्होंने मजदूरों से आह्वान किया कि वो एकजुट हो कर इनेलो-बसपा गठबंधन का साथ दे, ताकि आनेवाली सरकार गठबंधन की सरकार बने और मजदूर-कमेरों के हक के कानून बन सके। इस अवसर पर तुषार कौशिक, भूषण टांगरी, शाम लाल, उजागर सिंह, बलजिंदर सिंह, जीत सिंह, दमनप्रीत सिंह, सीमा रानी, गीता रानी, सन्तोष कुमार साह, जुल्फन खान, सुनील कुमार, ज्ञान कुमार, सिन्नी सेठी, संजय कुमार, गोरी यादव, मिथुन, विजय, दलीप कुमार, दीपक कुमार, अमन कुमार, सुभाष कुमार, अरविंद कुमार, सुमन, राम कुमार, लालू यादव सहित काफी संख्या में दिहाड़ीदार मजदूर उपस्तिथ थे।

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