अंबाला - जम्मूमेल में सफर कर रही एक गर्भवती महिला की प्राण रक्षा हेतु ट्रेन को अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर 20मिनट तक रोककर रखा गया। इस दौरान स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने से पहले एम्बुलैंस का इंतजाम करके दर्द से कराह रही गर्भवती महिला को अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया गया। जहां एक 7 माह की प्री-मैच्योर बेटी ने जन्म लिया। जन्म के समय मात्र डेढ़ किलो वजन की इस बेटी की नाजुक हालत को देखते हुए इसे आज तड़के अंबाला शहर के सिविल अस्पताल रैफर किया गया जहां के एसएनसीयू वार्ड के
इंकूवेटर में यह बच्ची उपचाराधीन है। यह जानकारी देते हुए अंबाला के सीएमओ डॉक्टर विनोद गुप्ता ने बताया कि फिलहाल इस बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अर्ल गगन इसकी हालत पर निरंतर नजर रखे हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू में मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण
करने वाला 25 वर्षीय राकेश पाल अपनी 23 वर्षीय गर्भवती पत्नी प्यारी और 11 मास
की 1 बेटी के साथ 14034 जम्मूमेल में सफर कर रहा था। जब यह गाड़ी अंबाला छावनी
रेलवे स्टेशन पर 15 मिनट बाद पहुंचने वाली थी तो गर्भवती महिला को असहनीय पीड़ा होने लगी। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ती देखकर उस कोच नंबर एनआरजीएसएलआरडी 13759 में सफर कर रहे एक रेल यात्री ने रेलवे सहायता केन्द्र को महिला की मदद के लिए सूचित किया। जैसे ही यह ट्रेेन छावनी रेलवे स्टेशन पर पहुंची वैसे ही उपरोक्त कोच के निकट पहुंचकर रेलकर्मियों ने वहां पहले से मंगवाई गई एम्बुलैंस में इस गर्भवती महिला को बिठाया। इस एम्बुलैंस ने उसे तत्काल अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया। जहां रात 2 बजे इस महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन मात्र डेढ़ किलो होने तथा 7 मास की गर्भावस्था के बाद डिलीवरी होने के कारण बच्ची की हालत काफी नाजुक थी जिसे
देखते हुए बीती देर रात को ही उसे सिविल अस्पताल अंबाला एसएनसीयू वार्ड में भेज दिया गया जहां वह इंकूवेटर में उपचाराधीन है। मध्यप्रदेश के छत्तरपुर जिला के गांव नाडिया तलवापुरवा निवासी राकेश पाल ने बताया कि उसकी
सबसे बड़ी 3 साल की बेटी गांव में ही अपने दादा-दादी के पास रहती है जबकि उससे छोटी 11 मास की बेटी उनके साथ ही सफर कर रही थी। उसने बताया कि अपने गांव जाने के लिए वे सुबह 11 बजे जम्मू स्टेशन से टाटामुरी एक्सप्रैस में सवार हुए थे लेकिन चक्की बैंक पर जब गाड़ी रूकी तो उसकी पत्नी की हालत खराब होने लगी।
उन्होंने इस ट्रेन को वहीं छोड़ दिया और तबीयत ठीक होने पर बीती सायं सवा 7 बजे जम्मूमेल में सवार हो गये। रात को 11 बजे उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने लगी। जब छावनी रेलवे स्टेशन के नजदीक ट्रेन पहुंची तो उसकी पत्नी को असहनीय
करने वाला 25 वर्षीय राकेश पाल अपनी 23 वर्षीय गर्भवती पत्नी प्यारी और 11 मास
की 1 बेटी के साथ 14034 जम्मूमेल में सफर कर रहा था। जब यह गाड़ी अंबाला छावनी
रेलवे स्टेशन पर 15 मिनट बाद पहुंचने वाली थी तो गर्भवती महिला को असहनीय पीड़ा होने लगी। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ती देखकर उस कोच नंबर एनआरजीएसएलआरडी 13759 में सफर कर रहे एक रेल यात्री ने रेलवे सहायता केन्द्र को महिला की मदद के लिए सूचित किया। जैसे ही यह ट्रेेन छावनी रेलवे स्टेशन पर पहुंची वैसे ही उपरोक्त कोच के निकट पहुंचकर रेलकर्मियों ने वहां पहले से मंगवाई गई एम्बुलैंस में इस गर्भवती महिला को बिठाया। इस एम्बुलैंस ने उसे तत्काल अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया। जहां रात 2 बजे इस महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन मात्र डेढ़ किलो होने तथा 7 मास की गर्भावस्था के बाद डिलीवरी होने के कारण बच्ची की हालत काफी नाजुक थी जिसे
देखते हुए बीती देर रात को ही उसे सिविल अस्पताल अंबाला एसएनसीयू वार्ड में भेज दिया गया जहां वह इंकूवेटर में उपचाराधीन है। मध्यप्रदेश के छत्तरपुर जिला के गांव नाडिया तलवापुरवा निवासी राकेश पाल ने बताया कि उसकी
सबसे बड़ी 3 साल की बेटी गांव में ही अपने दादा-दादी के पास रहती है जबकि उससे छोटी 11 मास की बेटी उनके साथ ही सफर कर रही थी। उसने बताया कि अपने गांव जाने के लिए वे सुबह 11 बजे जम्मू स्टेशन से टाटामुरी एक्सप्रैस में सवार हुए थे लेकिन चक्की बैंक पर जब गाड़ी रूकी तो उसकी पत्नी की हालत खराब होने लगी।
उन्होंने इस ट्रेन को वहीं छोड़ दिया और तबीयत ठीक होने पर बीती सायं सवा 7 बजे जम्मूमेल में सवार हो गये। रात को 11 बजे उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने लगी। जब छावनी रेलवे स्टेशन के नजदीक ट्रेन पहुंची तो उसकी पत्नी को असहनीय
दर्द होने लगा। साथ में सफर कर रहे रेल यात्रियों ने न जाने किसको फोन किया कि जब गाड़ी छावनी पहुंची तो उन्हें रेलकर्मियों की मदद से एक एम्बुलैंस में बिठाकर छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया गया। कुछ ही देर बाद उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। वहां मौजूद डॉक्टर ने खराब बताते हुए उन्हें एम्बुलैंस से शहर सिविल अस्पताल
भेज दिया। उसने बताया कि यहां से भी डॉक्टर उसे चड़ीगढ़ जाने की बात कह रहे थे लेकिन जब उसने बताया कि उसके पास चंडीगढ़ जाने तक के भी पैसे नहीं है तो फिर वे उसकी बेटी का यही ईलाज करने को सहमत हो गये।
भेज दिया। उसने बताया कि यहां से भी डॉक्टर उसे चड़ीगढ़ जाने की बात कह रहे थे लेकिन जब उसने बताया कि उसके पास चंडीगढ़ जाने तक के भी पैसे नहीं है तो फिर वे उसकी बेटी का यही ईलाज करने को सहमत हो गये।

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