सरकार भले ही बुलेट ट्रेन दौड़ाने और वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनो का जाल बिछाने की बात करे परन्तु कर्मचारियों की नाराजगी के सामने ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स खटाई में पड़ सकते हैं। जी हां रेल कर्मचारियों के हितों की आवाज उठाने वाली NRMU यूनियन भूख हड़ताल पर बैठ गयी है। यूनियन ने सरकार से कर्मचारी विरोधी फैसले वापिस लेने का आह्वान करते हुए आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
जब कर्मचारी ही नाराज हो जाएं तो किसी भी विभाग के लिए खतरे की घन्टी है। जी हां देश की जीवनरेखा कही जाने वाली रेलवे के कर्मचारी अपने ही विभाग और सरकार से खफा होकर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। NRMU यानी NORTHERN RAILWAY MEN'S UNION के बैनर तले ये कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं और सरकार को जगाने का प्रयास कर रहे हैं। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि सरकार रेलवे को लेकर दमनकारी रुख अपना रही है। रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है। कर्मचारी चाहते हैं कि रेल का निजीकरण या निगमीकरण करने की नीति पर तुरन्त रोक लगाई जाए। न्यूनतम वेतन एवं फिटमेंट फार्मूले में दिए गए आश्वासन के अनुरूप तत्काल सुधार हो। और NPS हटाकर गरेंटिड और फैमिली पेंशन पहले की तरह बहाल की जाए।
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने ऐलान किया कि यदि सरकार ने कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की तो उसे कर्मचारियों की नाराजगी मोल लेनी पड़ सकती है। रेलवे देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है और NRMU रेल कर्मचारियों के हितों की लड़ाई लम्बे समय से लड़ती आयी है और आगे भी लड़ती रहेगी। सरकार जान ले कि ये बेरुखी न तो रेलवे के हित में है और न ही कर्मचारी के हित में। यूनियन लीडरों ने बताया कि ये क्रमिक भूख हड़ताल कल यानि वीरवार को भी जारी रहेगी। मांगे पूरी न होने तक ये लड़ाई जारी रहेगी। चाहे वो भूखहड़ताल हो चाहे रेल रोको अभियान ही क्यों न हो।

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