किसानों की एक जून से 10 जून तक घोषित हड़ताल से गौशालाओं का गोवंश परेशान होने लगा है। नगर स्थित किसानों द्वारा हरे चारा की आपूर्ति ना किये जाने से गोशालाएं में हरे चारे कमी खलने लगी है। गोशाला प्रबन्धन मजबूरन गोवंश को हरे चारे की जगह खाने वाली तूड़ी में हरे चारे की जगह चोकर मिलाकर भूख मिटाने पर मजबूर नजर आ रहा है। वहीं हड़ताल को देखते हुए मार्कीट कमेटी ने किसानों से हरा चारा सीधा गोशालाओं में भेजने की अपील की है।
गोशालाओ में आ रही सबसे ज्यादा दिक्कत :
अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के किसानों ने एक जून से 10 जून तक सब्जी, दूध व हरे चारे की सप्लाई ठप्प करने व हड़ताल का सरकार को अल्टीमेटम दिया था। लेकिन सरकार के कानों पर जू रेंगती न देख उन्होंने एक जून से दूध , सब्जियों व चारे की सप्लाई ठप्प कर दी। जिससे जहां शहर में हरी सब्जियों, टमाटर सहित खाद्य वस्तुओं के दामो में उछाल आ गया वहीं वीटा व अन्य जगह दूध की सप्लाई ठप्प होने से दिक्कते आ रही है । शहर के चारों ओर आने वाले रास्तों पर किसान प्रतिनिधि सुबह 5 बजे खड़े होकर सब्जियों व दूध की सप्लाई करने वालो को रोक देते हैं। हालाँकि सुचना मिलने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया है। जिनके डर से शहर में कुछ दूध सप्लायर चोरी छिपे दूध डाल जाते हैं। यदि वे हडताली किसानों के हत्थे चढ़ जाते तो वे उनके दूध को सड़क पर गिरा देते। गौ पालक का कहना है कि वहीं चारा नगर में न आने से गोवंश के लिए परेशानी खड़ी हो गई और वे बिना हरे चारे मरने के कगार पर आ गई हैं। अंबाला की ग्वाल मंडी में रोजाना एक हज़ार क्विंटल हरे चारे की खपत होती थी अब पिछले चार दिनों से चारे की भारी कमी है। इसके बाद दुधारू गाय व भैंस ने दो से तीन किलो दूध कम देना शुरू कर दिया है। वहीं गोशाला सचिव का कहना है कि किसानो ने एक से दस जून तक जो हड़ताल की है वो असंवैधानिक तो नहीं है सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। चारा मंडियों में चार दिन से तुड़ी और हरे चारे की ट्राली नहीं आई है। हालात बाद से बदतर हो चुके हैं। गौशालाओं में गोवंश के पास खाने के लिए हरा चारा नहीं है। गाये भूखी मरने के कगार पर हैं। पहले ही गोवंश ज्यादा है और फिर नगर नगम द्वारा पकड़े आवारा गोवंश आने से चारे की दिक्कत है ऊपर से किसानों की हड़ताल से पिछले चार दिनों से चारे की सप्लाई ना होने से गोवंश को दिक्कत हो रही है। अब मजबूरन पोष्टिक हरे चारे की जगह तूड़ी में चोकर मिला कर गोवंश की भूख मिटाने की कोशिश जारी है। उनका कहना है कि यदि जल्द हरे चारे की सरकार और जिला प्रशासन ने व्यवस्था न की तो गोवंश मरने के कगार पर आ जायेगा।
वहीं दूध की डेयरी चलाने वाले भी हरा चारा न मिलने से परेशान हैं।उनका कहना है कि हरे चारे के स्टाक करके नही रखा जा सकता। ज्यादा से ज्यादा दो दिन तक का हरा चारा गर्मी में रह सकता है। उन्हें भी किसानों की हड़ताल से दिक्कत तो है लेकिन सरकार को भी किसानों की जायज मांग को देखते हुए कोई हल निकलना चाहिए तांकि बेजुबान गोवंश की रक्षा की जा सके। वहीं हरे चारे की आपूर्ति न होने से चारा काटने ओर बेचने की मशीनें भी बंद पड़ी हैं। पिछले चार दिनों से चल रही किसानों जी हड़ताल का असर साफ दिख रहा है। सरकार जल्द किसानों से बातचीत करके इस समस्या का हल करे जिससे गोवंश की चारे की समस्या के साथ चारा बेचने वालों की रोज़ी रोटी भी चल सके।
वहीं किसानों की हड़ताल का असर अब सब्जी, दूध सहित बेजुबान पशुओं पर भी देखने को मिल रहा है। जहां दूध की कमी से इंसान प्रभावित हैं वहीं बेजुबान पशु भी भूख के कगार पर हैं। मार्किट कमेटी सचिव ने किसानों से अपील की है कि वे चारा मंडी में चारा बेशक न ले जाये लेकिन सीधे गोशालाओं को सप्लाई दे जिससे बेजुबान पशुओं को बचाया जा सके।सचिव ने किसानो से अपील की है कि बेजुबान जानवरों की भलाई के लिए वे चारा मंडियों में बेशक चारा ना लाये लेकिन गोशालाओं में सीधे हरे चारे डालने की व्यवस्था जरूर करे जिससे गोवंश को भूख से बचाया जा सके।

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