Monday, 4 December 2017
Sunday, 3 December 2017
अंबाला ट्रैफिक पुलिस से पंगा लेने से पहले जान ले ट्रैफिक पुलिस अब स्पाई कैम के साथ ड्यूटी करती है .
भ्रष्टाचार के सबसे ज्यादा आरोप ट्रैफिक पुलिस पर लगते हैं लेकिन अंबाला पुलिस ने इसका तौड़ निकालते हुए ट्रैफिक में तैनात कर्मचारीयों को हिडन कैमरे दिए हैं। जिसे लगाकर ही वो चालान काट सकेंगे व ड्यूटी कर सकेंगे। ऐसा एक तो भ्रष्टाचार व दूसरा पुलिस के साथ दुर्व्यवहार करने वालो पर नकेल कसने के लिए किया गया है।
अंबाला पुलिस दिन प्रतिदिन हाईटेक होती दिख रही है। अंबाला पुलिस ने महकमे में करप्शन पर नकेल कसने के लिए काफी अच्छा तौड़ निकाला है जो पुलिस की छवि को तो सुधारेगा ही साथ ही ड्यूटी के दौरान मस्त रहने वालो पर लगाम भी लगाएगा। अंबाला में ट्रैफिक पुलिस को ड्यूटी करने के दौरान स्पाई कैम दिए गये हैं जो हर समय उनकी जेब पर लगा होगा उसमे वीडियो के साथ आडियो भी रिकार्ड होगी। ऐसा इसलिए किया गया है कि एक ट्रैफिक कर्मचारी ड्यूटी में लापरवाही न बरते दूसरा उन आरोपों से भी बचा जा सके कि ट्रैफिक कर्मी ने उनसे वाहन चेकिंग के दौरान पैसे मांगे या बदतमीजी की। अंबाला पुलिस ने यह हर कर्मी के लिए जरूरी कर दिया है कि जब भी वो ड्यूटी पर हो या वाहन चेकिंग कर रहा हो तो वो यह पाकेट कैमरा लगाकर रखे व इसकी रिकार्डिंग ओन करके ही काम करे। ट्रैफिक SHO ने बताया कि अक्सर चेकिंग के दौरान कर्मचारियों से लोग बदतमीजी कर जाते हैं व कई तरह के आरोप भी मढ़ देते हैं इन कैमरों की मदद से सब कुछ सामने आ जायेगा कि कौन सही है या गलत। इस कैमरे की मदद से यह भी पता चलेगा की कोई कर्मी ड्यूटी के दौरान किसी तरह से उगाही तो नही कर रहा।
पुलिस का यह कदम सराहनीय व उचित तो है लेकिन जिन्हें घुस की आदत पड़ जाए उन्हें रोक पाना काफी मुश्किल है। देखना यह होगा कि पुलिस की यह कोशिश कितना रंग लाती है व कितना लम्बा चलती है।
भारत का संसद भवन फिर से चमकेगा , अलग तरह की तकनीक का हो रहा इस्तेमाल ।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और इंटेक की देखरेख में संसद भवन को चमकाने का यह काम शुरु हो चुका है, लेकिन इस काम को पूरा होने में लंबा समय लगेगा।
Saturday, 2 December 2017
हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर सांसदों और विधायकों के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने की मांग की
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि सांसदों व विधायकों के लिए शैक्षणिक योग्यता जरूरी की जाए ।
इससे पहले हरियाणा में पँचायत चुनावों में पंचों व सरपंचों के लिए भी पढ़ा लिखा होना जरूरी किया गया था जिसके बाद हरियाणा में पढ़ी लिखी पंचायत चुनी गई थी । अब देखना होगा कि केंद्र सरकार हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की चिट्ठी पर कोई संज्ञान लेती है या नही ?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में हरियाणा का आया तीसरा नम्बर डीजीपी ने कहा हमारे पास फोर्स की कमीं ।
रोहतक। पंचकूला में डेरे के अनुयायियों द्वारा पंचकूला में आगजनी मामले में पुलिस द्वारा हनीप्रीत को मुख्य आरोपी बनाने जबकि राम रहीम का नाम चार्जशीट में नहीं होने पर डीजीपी बीएस संधू ने कहा कि अभी इस मामले में जांच की जा रही है अौर लोगों से भी पूछताछ की जाएगी। इस मामले में अभी अौर भी गिरफ्तारी की जाएगी। डीजीपी रोहतक में मित्र कक्ष का उद्घाटन करने के लिए आए थे। और क्या कहा डीजीपी ने...
- नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो
की ओर से जारी किए गए आंकड़े हरियाणा को शर्मसार करने वाले हैं, क्योंकि लूट, रेप, हत्या, दंगा-फसाद जैसी हिंसक वारदातों में म्हारा प्रदेश तीसरे नंबर पर आया है। यूपी और बिहार जैसे प्रदेश भी हरियाणा से पीछे छूट गए हैं, इस पर हरियाणा के डीजीपी का कहना है कि उनके पास फोर्स की कमी है।
- क्राइम को कंट्रोल करने के लिए हरियाणा में शुरुआत में 7000 पुलिस कर्मियों की भर्ती होगी। गुड़गांव में एक दिन में पांच रेप के मामले सामने आए हैं। इस पर डीजीपी ने कहा कि उनके पास शिकायत आती हैं अौर वह जांच कर कार्रवाई करते हैं।
- नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो
की ओर से जारी किए गए आंकड़े हरियाणा को शर्मसार करने वाले हैं, क्योंकि लूट, रेप, हत्या, दंगा-फसाद जैसी हिंसक वारदातों में म्हारा प्रदेश तीसरे नंबर पर आया है। यूपी और बिहार जैसे प्रदेश भी हरियाणा से पीछे छूट गए हैं, इस पर हरियाणा के डीजीपी का कहना है कि उनके पास फोर्स की कमी है।
- क्राइम को कंट्रोल करने के लिए हरियाणा में शुरुआत में 7000 पुलिस कर्मियों की भर्ती होगी। गुड़गांव में एक दिन में पांच रेप के मामले सामने आए हैं। इस पर डीजीपी ने कहा कि उनके पास शिकायत आती हैं अौर वह जांच कर कार्रवाई करते हैं।
गर्भवती महिला की प्राण रक्षा के लिए ट्रेन को अंबाला स्टेशन पर 20 मिनट तक रोका गया ।
अंबाला - जम्मूमेल में सफर कर रही एक गर्भवती महिला की प्राण रक्षा हेतु ट्रेन को अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर 20मिनट तक रोककर रखा गया। इस दौरान स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने से पहले एम्बुलैंस का इंतजाम करके दर्द से कराह रही गर्भवती महिला को अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया गया। जहां एक 7 माह की प्री-मैच्योर बेटी ने जन्म लिया। जन्म के समय मात्र डेढ़ किलो वजन की इस बेटी की नाजुक हालत को देखते हुए इसे आज तड़के अंबाला शहर के सिविल अस्पताल रैफर किया गया जहां के एसएनसीयू वार्ड के
इंकूवेटर में यह बच्ची उपचाराधीन है। यह जानकारी देते हुए अंबाला के सीएमओ डॉक्टर विनोद गुप्ता ने बताया कि फिलहाल इस बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अर्ल गगन इसकी हालत पर निरंतर नजर रखे हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू में मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण
करने वाला 25 वर्षीय राकेश पाल अपनी 23 वर्षीय गर्भवती पत्नी प्यारी और 11 मास
की 1 बेटी के साथ 14034 जम्मूमेल में सफर कर रहा था। जब यह गाड़ी अंबाला छावनी
रेलवे स्टेशन पर 15 मिनट बाद पहुंचने वाली थी तो गर्भवती महिला को असहनीय पीड़ा होने लगी। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ती देखकर उस कोच नंबर एनआरजीएसएलआरडी 13759 में सफर कर रहे एक रेल यात्री ने रेलवे सहायता केन्द्र को महिला की मदद के लिए सूचित किया। जैसे ही यह ट्रेेन छावनी रेलवे स्टेशन पर पहुंची वैसे ही उपरोक्त कोच के निकट पहुंचकर रेलकर्मियों ने वहां पहले से मंगवाई गई एम्बुलैंस में इस गर्भवती महिला को बिठाया। इस एम्बुलैंस ने उसे तत्काल अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया। जहां रात 2 बजे इस महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन मात्र डेढ़ किलो होने तथा 7 मास की गर्भावस्था के बाद डिलीवरी होने के कारण बच्ची की हालत काफी नाजुक थी जिसे
देखते हुए बीती देर रात को ही उसे सिविल अस्पताल अंबाला एसएनसीयू वार्ड में भेज दिया गया जहां वह इंकूवेटर में उपचाराधीन है। मध्यप्रदेश के छत्तरपुर जिला के गांव नाडिया तलवापुरवा निवासी राकेश पाल ने बताया कि उसकी
सबसे बड़ी 3 साल की बेटी गांव में ही अपने दादा-दादी के पास रहती है जबकि उससे छोटी 11 मास की बेटी उनके साथ ही सफर कर रही थी। उसने बताया कि अपने गांव जाने के लिए वे सुबह 11 बजे जम्मू स्टेशन से टाटामुरी एक्सप्रैस में सवार हुए थे लेकिन चक्की बैंक पर जब गाड़ी रूकी तो उसकी पत्नी की हालत खराब होने लगी।
उन्होंने इस ट्रेन को वहीं छोड़ दिया और तबीयत ठीक होने पर बीती सायं सवा 7 बजे जम्मूमेल में सवार हो गये। रात को 11 बजे उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने लगी। जब छावनी रेलवे स्टेशन के नजदीक ट्रेन पहुंची तो उसकी पत्नी को असहनीय
करने वाला 25 वर्षीय राकेश पाल अपनी 23 वर्षीय गर्भवती पत्नी प्यारी और 11 मास
की 1 बेटी के साथ 14034 जम्मूमेल में सफर कर रहा था। जब यह गाड़ी अंबाला छावनी
रेलवे स्टेशन पर 15 मिनट बाद पहुंचने वाली थी तो गर्भवती महिला को असहनीय पीड़ा होने लगी। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ती देखकर उस कोच नंबर एनआरजीएसएलआरडी 13759 में सफर कर रहे एक रेल यात्री ने रेलवे सहायता केन्द्र को महिला की मदद के लिए सूचित किया। जैसे ही यह ट्रेेन छावनी रेलवे स्टेशन पर पहुंची वैसे ही उपरोक्त कोच के निकट पहुंचकर रेलकर्मियों ने वहां पहले से मंगवाई गई एम्बुलैंस में इस गर्भवती महिला को बिठाया। इस एम्बुलैंस ने उसे तत्काल अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया। जहां रात 2 बजे इस महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन मात्र डेढ़ किलो होने तथा 7 मास की गर्भावस्था के बाद डिलीवरी होने के कारण बच्ची की हालत काफी नाजुक थी जिसे
देखते हुए बीती देर रात को ही उसे सिविल अस्पताल अंबाला एसएनसीयू वार्ड में भेज दिया गया जहां वह इंकूवेटर में उपचाराधीन है। मध्यप्रदेश के छत्तरपुर जिला के गांव नाडिया तलवापुरवा निवासी राकेश पाल ने बताया कि उसकी
सबसे बड़ी 3 साल की बेटी गांव में ही अपने दादा-दादी के पास रहती है जबकि उससे छोटी 11 मास की बेटी उनके साथ ही सफर कर रही थी। उसने बताया कि अपने गांव जाने के लिए वे सुबह 11 बजे जम्मू स्टेशन से टाटामुरी एक्सप्रैस में सवार हुए थे लेकिन चक्की बैंक पर जब गाड़ी रूकी तो उसकी पत्नी की हालत खराब होने लगी।
उन्होंने इस ट्रेन को वहीं छोड़ दिया और तबीयत ठीक होने पर बीती सायं सवा 7 बजे जम्मूमेल में सवार हो गये। रात को 11 बजे उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने लगी। जब छावनी रेलवे स्टेशन के नजदीक ट्रेन पहुंची तो उसकी पत्नी को असहनीय
दर्द होने लगा। साथ में सफर कर रहे रेल यात्रियों ने न जाने किसको फोन किया कि जब गाड़ी छावनी पहुंची तो उन्हें रेलकर्मियों की मदद से एक एम्बुलैंस में बिठाकर छावनी के सिविल अस्पताल में पहुंचाया गया। कुछ ही देर बाद उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। वहां मौजूद डॉक्टर ने खराब बताते हुए उन्हें एम्बुलैंस से शहर सिविल अस्पताल
भेज दिया। उसने बताया कि यहां से भी डॉक्टर उसे चड़ीगढ़ जाने की बात कह रहे थे लेकिन जब उसने बताया कि उसके पास चंडीगढ़ जाने तक के भी पैसे नहीं है तो फिर वे उसकी बेटी का यही ईलाज करने को सहमत हो गये।
भेज दिया। उसने बताया कि यहां से भी डॉक्टर उसे चड़ीगढ़ जाने की बात कह रहे थे लेकिन जब उसने बताया कि उसके पास चंडीगढ़ जाने तक के भी पैसे नहीं है तो फिर वे उसकी बेटी का यही ईलाज करने को सहमत हो गये।
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